✒️...एक जमाना था -
तन ढकने को कपड़े न थे,
फिर भी लोग तन ढ़कने का
प्रयास करते थे ।
आज कपड़ों के भंडार हैं,
फिर भी तन दिखाने का
प्रयास करते हैं
*हम सभ्य जो हो रहे हैं ।*
एक जमाना था, आवागमन
के साधन कम थे।
फिर भी लोग परिजनों से
मिला करते थे।
आज आवागमन के
साधनों की भरमार है।
फिर भी लोग न मिलने के
बहाने बनाते हैं ।
*हम सभ्य जो हो रहे हैं ।*
एक जमाना था, गाँव की
बेटी का सब ख्याल रखते थे।
आज पड़ौसी की बेटी को भी
उठा ले जाते हैं ।
*हम सभ्य जो हो रहे हैं ।*
एक जमाना था, लोग
नगर-मौहल्ले के बुजुर्गों का
हालचाल पूछते थे ।
आज माँ-बाप तक को
वृद्धाश्रम में डाल देते हैं ।
*हम सभ्य जो हो रहे हैं ।*
एक जमाना था,
।खिलौनों की कमी थी ।
फिर भी मौहल्ले भर के बच्चे
साथ खेला करते थे ।
आज खिलौनों की भरमार है,
पर घर-द्वार तक बंद हैं ।
*हम सभ्य जो हो रहे हैं ।*
एक जमाना था,
गली-मोहल्ले के जानवर
तक को रोटी दी जाती थी ।
आज पड़ौसी के बच्चे भी
भूखे सो जाते हैं ।
**हम सभ्य जो हो रहे हैं !*
एक जमाना था,
नगर-मोहल्ले मे आए
अनजान का भी पूरा
परिचय पूछ लेते थे ।
आज तो पड़ौसी के घर
आए मेहमान का नाम भी
नहीं पूछते ।
*हम सभ्य जो हो रहे हैं !*
*वाह री सभ्यता !*
🙏🕉️🙏
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