Saturday, November 27, 2021

वाह री सभ्यता

✒️...एक जमाना था - 
तन ढकने को कपड़े न थे,
फिर भी लोग तन ढ़कने का
प्रयास करते थे ।
आज कपड़ों के भंडार हैं, 
फिर भी तन दिखाने का 
प्रयास करते हैं 
*हम सभ्य जो हो रहे हैं ।*

एक जमाना था, आवागमन
के साधन कम थे।
फिर भी लोग परिजनों से 
मिला करते थे।
आज आवागमन के 
साधनों की भरमार है।
फिर भी लोग न मिलने के
बहाने बनाते हैं ।
*हम सभ्य जो हो रहे हैं ।*

एक जमाना था, गाँव की 
बेटी का सब ख्याल रखते थे।
आज पड़ौसी की बेटी को भी
उठा ले जाते हैं ।
*हम सभ्य जो हो रहे हैं ।*

एक जमाना था, लोग 
नगर-मौहल्ले के बुजुर्गों का
हालचाल पूछते थे ।
आज माँ-बाप तक को 
वृद्धाश्रम में डाल देते हैं ।
*हम सभ्य जो हो रहे हैं ।*

एक जमाना था, 
 ।खिलौनों की कमी थी ।
फिर भी मौहल्ले भर के बच्चे
साथ खेला करते थे ।
आज खिलौनों की भरमार है,
पर घर-द्वार तक बंद हैं । 
*हम सभ्य जो हो रहे हैं ।*

एक जमाना था, 
गली-मोहल्ले के जानवर 
तक को रोटी दी जाती थी ।
आज पड़ौसी के बच्चे भी 
भूखे सो जाते हैं ।
**हम सभ्य जो हो रहे हैं !*

एक जमाना था, 
नगर-मोहल्ले मे आए 
अनजान का भी पूरा 
परिचय पूछ लेते थे ।
आज तो पड़ौसी के घर 
आए मेहमान का नाम भी
नहीं पूछते ।
*हम सभ्य जो हो रहे हैं !*

*वाह री सभ्यता !*
   🙏🕉️🙏

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