Tuesday, November 30, 2021

विश्व विजयी भारतीय संस्कृति🚩

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🔰सिन्धु घाटी की लिपि : क्यों अंग्रेज़ और कम्युनिस्ट इतिहासकार नहीं चाहते थे कि इसे पढ़ाया जाए! 🔰
▪️इतिहासकार अर्नाल्ड जे टायनबी ने कहा था - विश्व के इतिहास में अगर किसी देश के इतिहास के साथ सर्वाधिक छेड़ छाड़ की गयी है, तो वह भारत का इतिहास ही है।
भारतीय इतिहास का प्रारम्भ सिन्धु घाटी की सभ्यता से होता है, इसे हड़प्पा कालीन सभ्यता या सारस्वत सभ्यता भी कहा जाता है। बताया जाता है, कि वर्तमान सिन्धु नदी के तटों पर 3500 BC (ईसा पूर्व) में एक विशाल नगरीय सभ्यता विद्यमान थी। मोहनजोदारो, हड़प्पा, कालीबंगा, लोथल आदि इस सभ्यता के नगर थे।

पहले इस सभ्यता का विस्तार सिंध, पंजाब, राजस्थान और गुजरात आदि बताया जाता था, किन्तु अब इसका विस्तार समूचा भारत, तमिलनाडु से वैशाली बिहार तक, आज का पूरा पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान तथा (पारस) ईरान का हिस्सा तक पाया जाता है। अब इसका समय 7000 BC  से भी प्राचीन पाया गया है।

इस प्राचीन सभ्यता की सीलों, टेबलेट्स और बर्तनों पर जो लिखावट पाई जाती है उसे सिन्धु घाटी की लिपि कहा जाता है। इतिहासकारों का दावा है, कि यह लिपि अभी तक अज्ञात है, और पढ़ी नहीं जा सकी। जबकि सिन्धु घाटी की लिपि से समकक्ष और तथाकथित प्राचीन सभी लिपियां जैसे इजिप्ट, चीनी, फोनेशियाई, आर्मेनिक, सुमेरियाई, मेसोपोटामियाई आदि सब पढ़ ली गयी हैं।

आजकल कम्प्यूटरों की सहायता से अक्षरों की आवृत्ति का विश्लेषण कर मार्कोव विधि से प्राचीन भाषा को पढना सरल हो गया है।

सिन्धु घाटी की लिपि को जानबूझ कर नहीं पढ़ा गया और न ही इसको पढने के सार्थक प्रयास किये गए।
भारतीय इतिहास अनुसन्धान परिषद (Indian Council of Historical Research) जिस पर पहले अंग्रेजो और फिर कम्युनिस्टों का कब्ज़ा रहा, ने सिन्धु घाटी की लिपि को पढने की कोई भी विशेष योजना नहीं चलायी।

आखिर ऐसा क्या था सिन्धु घाटी की लिपि में? अंग्रेज और कम्युनिस्ट इतिहासकार क्यों नहीं चाहते थे, कि सिन्धु घाटी की लिपि को पढ़ा जाए?

अंग्रेज और कम्युनिस्ट इतिहासकारों की नज़रों में सिन्धु घाटी की लिपि को पढने में निम्नलिखित खतरे थे -

1. सिन्धु घाटी की लिपि को पढने के बाद उसकी प्राचीनता और अधिक पुरानी सिद्ध हो जायेगी। इजिप्ट, चीनी, रोमन, ग्रीक, आर्मेनिक, सुमेरियाई, मेसोपोटामियाई से भी पुरानी. जिससे पता चलेगा, कि यह विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता है। भारत का महत्व बढेगा जो अंग्रेज और कम्युनिस्ट इतिहासकारों को बर्दाश्त नहीं होगा।
2. सिन्धु घाटी की लिपि को पढने से अगर वह वैदिक सभ्यता साबित हो गयी तो अंग्रेजो और कम्युनिस्टों द्वारा फैलाये गए आर्य- द्रविड़ युद्ध वाले प्रोपगंडा के ध्वस्त हो जाने का डर है।
3. अंग्रेज और कम्युनिस्ट इतिहासकारों द्वारा दुष्प्रचारित ‘आर्य बाहर से आई हुई आक्रमणकारी जाति है और इसने यहाँ के मूल निवासियों अर्थात सिन्धु घाटी के लोगों को मार डाला व भगा दिया और उनकी महान सभ्यता नष्ट कर दी। वे लोग ही जंगलों में छुप गए, दक्षिण भारतीय (द्रविड़) बन गए, शूद्र व आदिवासी बन गए’, आदि आदि गलत साबित हो जायेगा।
कुछ फर्जी इतिहासकार सिन्धु घाटी की लिपि को सुमेरियन भाषा से जोड़ कर पढने का प्रयास करते रहे तो कुछ इजिप्शियन भाषा से, कुछ चीनी भाषा से, कुछ इनको मुंडा आदिवासियों की भाषा, और तो और, कुछ इनको ईस्टर द्वीप के आदिवासियों की भाषा से जोड़ कर पढने का प्रयास करते रहे। ये सारे प्रयास असफल साबित हुए।

सिन्धु घाटी की लिपि को पढने में निम्लिखित समस्याए बताई जाती है - 
सभी लिपियों में अक्षर कम होते है, जैसे अंग्रेजी में 26, देवनागरी में 52 आदि, मगर सिन्धु घाटी की लिपि में लगभग 400 अक्षर चिन्ह हैं। सिन्धु घाटी की लिपि को पढने में यह कठिनाई आती है, कि इसका काल 7000 BC से 1500 BC तक का है, जिसमे लिपि में अनेक परिवर्तन हुए साथ ही लिपि में स्टाइलिश वेरिएशन बहुत पाया जाता है। लेखक ने लोथल और कालीबंगा में सिन्धु घाटी व हड़प्पा कालीन अनेक पुरातात्विक साक्षों का अवलोकन किया।
भारत की प्राचीनतम लिपियों में से एक लिपि है जिसे ब्राह्मी लिपि कहा जाता है। इस लिपि से ही भारत की अन्य भाषाओँ की लिपियां बनी। यह लिपि वैदिक काल से गुप्त काल तक उत्तर पश्चिमी भारत में उपयोग की जाती थी। संस्कृत, पाली, प्राकृत के अनेक ग्रन्थ ब्राह्मी लिपि में प्राप्त होते है।
सम्राट अशोक ने अपने धम्म का प्रचार प्रसार करने के लिए ब्राह्मी लिपि को अपनाया। सम्राट अशोक के स्तम्भ और शिलालेख ब्राह्मी लिपि में लिखे गए और सम्पूर्ण भारत में लगाये गए।
सिन्धु घाटी की लिपि और ब्राह्मी लिपि में अनेक आश्चर्यजनक समानताएं है। साथ ही ब्राह्मी और तमिल लिपि का भी पारस्परिक सम्बन्ध है। इस आधार पर सिन्धु घाटी की लिपि को पढने का सार्थक प्रयास सुभाष काक और इरावाथम महादेवन ने किया।
सिन्धु घाटी की लिपि के लगभग 400 अक्षर के बारे में यह माना जाता है, कि इनमे कुछ वर्णमाला (स्वर व्यंजन मात्रा संख्या), कुछ यौगिक अक्षर और शेष चित्रलिपि हैं। अर्थात यह भाषा अक्षर और चित्रलिपि का संकलन समूह है। विश्व में कोई भी भाषा इतनी सशक्त और समृद्ध नहीं जितनी सिन्धु घाटी की भाषा।
बाएं लिखी जाती है, उसी प्रकार ब्राह्मी लिपि भी दाएं से बाएं लिखी जाती है। सिन्धु घाटी की लिपि के लगभग 3000 टेक्स्ट प्राप्त हैं।
इनमे वैसे तो 400 अक्षर चिन्ह हैं, लेकिन 39 अक्षरों का प्रयोग 80 प्रतिशत बार हुआ है। और ब्राह्मी लिपि में 45 अक्षर है। अब हम इन 39 अक्षरों को ब्राह्मी लिपि के 45 अक्षरों के साथ समानता के आधार पर मैपिंग कर सकते हैं और उनकी ध्वनि पता लगा सकते हैं।

ब्राह्मी लिपि के आधार पर सिन्धु घाटी की लिपि पढने पर सभी संस्कृत के शब्द आते है जैसे - श्री, अगस्त्य, मृग, हस्ती, वरुण, क्षमा, कामदेव, महादेव, कामधेनु, मूषिका, पग, पंच मशक, पितृ, अग्नि, सिन्धु, पुरम, गृह, यज्ञ, इंद्र, मित्र आदि।
निष्कर्ष यह है कि -
1. सिन्धु घाटी की लिपि ब्राह्मी लिपि की पूर्वज लिपि है।
2. सिन्धु घाटी की लिपि को ब्राह्मी के आधार पर पढ़ा जा सकता है।
3. उस काल में संस्कृत भाषा थी जिसे सिन्धु घाटी की लिपि में लिखा गया था।
4. सिन्धु घाटी के लोग वैदिक धर्म और संस्कृति मानते थे।
5. वैदिक धर्म अत्यंत प्राचीन है।
हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन व मूल सभ्यता है, हिन्दुओं का मूल निवास सप्त सैन्धव प्रदेश (सिन्धु सरस्वती क्षेत्र) था जिसका विस्तार ईरान से सम्पूर्ण भारत देश था।वैदिक धर्म को मानने वाले कहीं बाहर से नहीं आये थे और न ही वे आक्रमणकारी थे। आर्य - द्रविड़ जैसी कोई भी दो पृथक जातियाँ नहीं थीं जिनमे परस्पर युद्ध हुआ हो।
जय सनातन विश्व गुरु भारत 🚩

Saturday, November 27, 2021

वाह री सभ्यता

✒️...एक जमाना था - 
तन ढकने को कपड़े न थे,
फिर भी लोग तन ढ़कने का
प्रयास करते थे ।
आज कपड़ों के भंडार हैं, 
फिर भी तन दिखाने का 
प्रयास करते हैं 
*हम सभ्य जो हो रहे हैं ।*

एक जमाना था, आवागमन
के साधन कम थे।
फिर भी लोग परिजनों से 
मिला करते थे।
आज आवागमन के 
साधनों की भरमार है।
फिर भी लोग न मिलने के
बहाने बनाते हैं ।
*हम सभ्य जो हो रहे हैं ।*

एक जमाना था, गाँव की 
बेटी का सब ख्याल रखते थे।
आज पड़ौसी की बेटी को भी
उठा ले जाते हैं ।
*हम सभ्य जो हो रहे हैं ।*

एक जमाना था, लोग 
नगर-मौहल्ले के बुजुर्गों का
हालचाल पूछते थे ।
आज माँ-बाप तक को 
वृद्धाश्रम में डाल देते हैं ।
*हम सभ्य जो हो रहे हैं ।*

एक जमाना था, 
 ।खिलौनों की कमी थी ।
फिर भी मौहल्ले भर के बच्चे
साथ खेला करते थे ।
आज खिलौनों की भरमार है,
पर घर-द्वार तक बंद हैं । 
*हम सभ्य जो हो रहे हैं ।*

एक जमाना था, 
गली-मोहल्ले के जानवर 
तक को रोटी दी जाती थी ।
आज पड़ौसी के बच्चे भी 
भूखे सो जाते हैं ।
**हम सभ्य जो हो रहे हैं !*

एक जमाना था, 
नगर-मोहल्ले मे आए 
अनजान का भी पूरा 
परिचय पूछ लेते थे ।
आज तो पड़ौसी के घर 
आए मेहमान का नाम भी
नहीं पूछते ।
*हम सभ्य जो हो रहे हैं !*

*वाह री सभ्यता !*
   🙏🕉️🙏

Friday, November 26, 2021

प्रोटोकॉल आम जनता की सुविधा के लिए होना चाहिए

प्रोटोकॉल आम जनता की सुविधा के लिए होना चाहिए
भारत में सेवा करने वाले ब्रिटिश अधिकारियों को इंग्लैंड लौटने पर सार्वजनिक पद/जिम्मेदारी नहीं दी जाती थी। तर्क यह था कि उन्होंने एक गुलाम राष्ट्र पर शासन किया है जिसकी वजह से उनके दृष्टिकोण और व्यवहार में फर्क आ गया होगा। अगर उनको यहां ऐसी जिम्मेदारी दी जाए, तो वह आजाद ब्रिटिश नागरिकों के साथ भी उसी तरह से ही व्यवहार करेंगे। इस बात को समझने के लिए नीचे दिया गया वाकया जरूर पढ़ें -

एक ब्रिटिश महिला जिसका पति ब्रिटिश शासन के दौरान पाकिस्तान और भारत में एक सिविल सेवा अधिकारी था। महिला ने अपने जीवन के कई साल भारत के विभिन्न हिस्सों में बिताए, अपनी वापसी पर उन्होंने अपने संस्मरणों पर आधारित एक सुंदर पुस्तक लिखी।

महिला ने लिखा कि जब मेरे पति एक जिले के डिप्टी कमिश्नर थे तो मेरा बेटा करीब चार साल का था और मेरी बेटी एक साल की थी। डिप्टी कलेक्टर को मिलने वाली कई एकड़ में बनी एक हवेली में रहते थे। सैकड़ों लोग डीसी के घर और परिवार की सेवा में लगे रहते थे। हर दिन पार्टियां होती थीं, जिले के बड़े जमींदार हमें अपने शिकार कार्यक्रमों में आमंत्रित करने में गर्व महसूस करते थे और हम जिसके पास जाते थे, वह इसे सम्मान मानता था। हमारी शान और शौकत ऐसी थी कि ब्रिटेन में महारानी और शाही परिवार भी मुश्किल से मिलती होगी।

ट्रेन यात्रा के दौरान डिप्टी कमिश्नर के परिवार के लिए नवाबी ठाट से लैस एक आलीशान कंपार्टमेंट आरक्षित किया जाता था। जब हम ट्रेन में चढ़ते तो सफेद कपड़े वाला ड्राइवर दोनों हाथ बांधकर हमारे सामने खड़ा हो जाता और यात्रा शुरू करने की अनुमति मांगता। अनुमति मिलने के बाद ही ट्रेन चलने लगती।

एक बार जब हम यात्रा के लिए ट्रेन में सवार हुए, तो परंपरा के अनुसार, ड्राइवर आया और अनुमति मांगी।  इससे पहले कि मैं कुछ बोल पाती, मेरे बेटे का किसी कारण से मूड खराब था। उसने ड्राइवर को गाड़ी न चलाने को कहा।  ड्राइवर ने हुक्म बजा लाते हुए हुए कहा, जो हुक्म छोटे सरकार।  कुछ देर बाद स्टेशन मास्टर समेत पूरा स्टाफ इकट्ठा हो गया और मेरे चार साल के बेटे से भीख मांगने लगा, लेकिन उसने ट्रेन को चलाने से मना कर दिया। आखिरकार, बड़ी मुश्किल से, मैंने अपने बेटे को कई चॉकलेट के वादे पर ट्रेन चलाने के लिए राजी किया और यात्रा शुरू हुई।

कुछ महीने बाद, वह महिला अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने यूके लौट आई। वह जहाज से लंदन पहुंचे, उनकी रिहाइश वेल्स में एक काउंटी में थी जिसके लिए उन्हें ट्रेन से यात्रा करनी थी। वह महिला स्टेशन पर एक बेंच पर अपनी बेटी और बेटे को बैठाकर टिकट लेने चली गई। लंबी कतार के कारण बहुत देर हो चुकी थी, जिससे उस महिला का बेटा बहुत परेशान हो गया था। जब वह ट्रेन में चढ़े तो आलीशान कंपाउंड की जगह फर्स्ट क्लास की सीटें देखकर उस बच्चे को फिर गुस्सा आ गया।

ट्रेन ने समय पर यात्रा शुरू की तो वह बच्चा लगातार चीखने-चिल्लाने लगा। वह ज़ोर से कह रहा था, "यह कैसा उल्लू का पट्ठा ड्राइवर है। उसने हमारी अनुमति के बिना  ट्रेन चलाना शुरू कर दी है। मैं पापा को बोल कर इसे जूते लगवा दूंगा।" महिला को बच्चे को यह समझाना मुश्किल हो रहा था कि यह उसके पिता का जिला नहीं है, यह एक स्वतंत्र देश है। यहां डिप्टी कमिश्नर जैसा तीसरे दर्जे का सरकारी अफसर तो क्या प्रधानमंत्री और राजा को भी यह अख्तियार नहीं है कि वह लोगों को अपने अहंकार को संतुष्ट करने के लिए अपमानित कर सके

आज भले ही हमने अंग्रेजों को खदेड़ दिया है लेकिन हमने गुलामी को अभी तक देश निकाला नहीं किया। आज भी कई अधिकारी, एसपी, मंत्री, सलाहकार और राजनेता अपने अहंकार को संतुष्ट करने के लिए आम लोगों को घंटों सड़कों पर परेशान करते हैं। 

प्रोटोकॉल आम जनता की सुविधा के लिए होना चाहिए, ना कि उनके लिए परेशानी का कारण।

Thursday, November 25, 2021

स्वास्थ्य और ग्रह की वैज्ञानिकता

स्वास्थ्य और ग्रह की वैज्ञानिकता 
1. नमक पिसा हुआ- चन्द्र
2. लाल मिर्च पिसी हुई- सूर्य
3. हल्दी, पिसी हुई- गुरु
4. जीरा साबुत या पिसा हुआ- राहु, केतु
5. धनिया, पिसा हुआ- बुध
6. काली मिर्च, साबुत या पाउडर- शनि
7. अमचूर,पिसा हुआ- केतु
8. गर्म मसाला,पिसा हुआ- राहु
9. मेथी, साबुत- मंगल।

मसाले के सेवन से अपने स्वास्थ्य और ग्रहो को भी ठीक करे। भारतीय रसोई में मिलने वाले मसाले सेहत के लिए तो अच्छे होते ही है ,पर साथ में उन के सेवन से हमारे ग्रह भी अच्छे होते है।

सौंफ
सौंफ का उपयोग तो लगभग रोजाना करते है,पर क्या आप को पता है कि सौंफ के सेवन से आपका शुक्र और चन्द्र ग्रह मजबूत होता है।
इसे मिश्री के साथ ले या उस के बिना भी ले खाने के बाद, एसिडिटि और जी मिचलाने जैसी समस्या कम होने लगेंगी। सौंफ को गुड के साथ सेवन करें जब आप घर से किसी काम के लिए निकाल रहे हो , इस से आप का मंगल ग्रह आप का पूरा काम करने में साथ देता है।

दालचीनी 
दालचीनी मंगल ओर शुक्र ग्रह को ठीक करती है यदि किसी का मंगल और शुक्र कुपित है,तो थोड़ी सी दालचीनी को शहद में मिलाकर ताज़े पानी के साथ सेवन करें, इस से आप की शरीर में शक्ति बढ़ेगी और सर्दियों में कफ की समस्या कम परेशान करती है।

काली मिर्च 
काली मिर्च के सेवन से हमारा शुक्र और चंद्रमा अच्छा होता है काली मिर्च के सेवन से कफ की समस्या कम होती है और हमारी स्मरण शक्ति भी बढ़ती है तांबे के किसी बर्तन में काली मिर्च डालकर पर रखने से घर पर किसी की नज़र नहीं लगती है।

जौं
जौ के प्रयोग से सूर्य ग्रह और गुरु ग्रह ठीक होता है जौं के आटे की रोटी खाने से पथरी कभी नहीं होती है।

हरी इलायची
इस के प्रयोग से बुध ग्रह मजबूत होता है अगर किसी को दूध पचाने में परेशानी होती है तो हरी इलायची उस में पका कर फिर दूध का सेवन करें इस से ऐसी परेशानी नहीं होगी। ये उन लोगो के लिए लाभकारी है जिन को दूध अपनी सेहत बनाए रखने या कैल्सियम के लिए दूध तो पीना पड़ता है पर उसको पीकर पचाने में समस्या आती है।

हींग
हींग बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है हींग का नित्य सेवन करने से वात व पित्त के रोग नियंत्रित होते हैं हींग आप की पाचन शक्ति भी बढाती है व क्रोध समस्या से भी रहत देता है।

हल्दी
हल्दी के गुण हम सब जानते है, हल्दी के सेवन से बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है, हल्दी की गांठ को पीले धागे में बांधकर गुरुवार को गले में धारण करने से बृहस्पति के अच्छे फल मिलते है और यह तो हम सब को पता है की हल्दी का दूध पीने से Arthritis , Bones और Infections में अत्यधिक लाभ मिलता है।

जीरा
जीरा राहू व केतू का प्रतिनिधित्व करता है। जीरे का उपयोग भोजन में करने से आप के दैनिक जीवन में सौहार्द व शांति बने रहते हैं।

Wednesday, November 24, 2021

we love our country

 I LOVE MY INDIAइन 7 सालों में मोदी जी ने क्या किया जो आज तक स्वतंत्र भारत के इतिहास में कोई नहीं कर पाया। अवश्य पढ़ें कहीं बीच में ही छोड़ दिया तो आपकी आँखे बंद ही रह जाएंगी इसलिए पूरा अवश्य पढ़ें ,,

*पहली उपलब्धि* 
,200 साल तक हमारे देश को गुलाम बनाने वाले ब्रिटेन में 53 देशों की मीटिंग में मोदी जी महा अध्यक्ष बने,,,इसी बात से हर एक भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाना चाहिए,,,

*दूसरी उपलब्धि*
 UN मानवाधिकार परिषद में भारत की बड़ी जीत हुई है,,,सबसे ज्यादा वोटों के साथ बना सदस्य,, 97 वोटों की आवश्यकता थी मिले 188 वोट,,,, क्या अब भी भारत की जनता पूछेगी की मोदी विदेश क्यूँ जाते हैं,,,,

*तीसरी उपलब्धि*

दुनियाँ के 25 सबसे ताकतवर देशों की हुई लिस्ट जारी,,, भारत आया नम्बर चार पर हमसे आगे अमेरिका, रूस और चीन है,,,ये है मोदी युग,,,

*चौथी उपलब्धि* 
,,,1 लाख करोड़ के पार पहुँचा GST का मासिक टैक्स कलेक्शन,,,,, ये है एक चाय वाले का अर्थशास्त्र,,,

*पाँचवी उपलब्धि* 
,,,नए सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने में अमेरिका और जापान को पीछे छोड़ भारत पहुँचा दूसरे स्थान पर,,,,

*छठी उपलब्धि*,,,,,2017-18 में दोगुना हुआ सौर ऊर्जा का उत्पादन,,,,
चीन और अमेरिका भी दंग है,,, 

*सातवीं उपलब्धि* 
भारत की आसमान छू रही GDP को देखकर,,,
भारत की GDP 8.2%, चीन की 6.7% और अमेरिका की 4.2%। अब भी कहेंगे भारतीय की मोदी विदेश क्यों जाते हैं,,,

*आठवीं उपलब्धि*
 ,,, जल थल ओर आकाश तीनों क्षेत्रों से सुपरसोनिक मिसाइल दागने वाला दुनियाँ का पहला देश बना भारत,,, ये है मोदी युग,,,अगर आपको गर्व हुआ हो तो जयहिन्द लिखना न भूलें,,,,

*नवीं उपलब्धि*,
,,,,70 सालों में पाकिस्तान को कभी गरीब नहीं देखा,, लेकिन मोदी जी के आते ही पाकिस्तान कंगाल हो गया,,, दरअसल पाकिस्तान की कमाई का जरिया भारतीय नकली  नोटों का व्यापार था,,,, जिसे मोदी जी ने खत्म कर दिया,,,

*दसवीं उपलब्धि*
 को भी पढ़ें,,,,,, एक बात समझ में नहीं आयी,,,
2014 में कांग्रेसी रक्षामंत्री ऐ.के. एंटोनी ने कहा था देश कंगाल है हम राफेल तो क्या छोटा जेट भी नहीं ले सकते,,,,पर मोदी जी ने ईरान का कर्ज भी चुका दिया,,
राफेल डील भी करली,, S-400 भी ले रहे हैं!
आखिर कांग्रेस के समय देश का पैसा कहाँ जाता था,,,?

*ग्याहरवीं उपलब्धि* 
,, सेना को मिला बुलेटप्रूफ स्कार्पियो का सुरक्षा कवच,,,
जम्मू कश्मीर में मिली सेना को 2500 बुलेटप्रूफ स्कार्पियो,,,

*बाहरवीं उपलब्धि*
 ,,, अब आपको बताता हूँ भारत का इन 4 सालों में विकास क्या हुआ,,,
अर्थ व्यवस्था में फ्रांस को पीछे धकेल नम्बर 6 बना,,,

*तेहरवीं उपलब्धि* 
,,, ऑटो मार्केट में जर्मनी को पीछे छोड़ नम्बर 4 बना,,,

*चौदहवीं उपलब्धि*
 ,,,, बिजली उत्पादन में रूस को पीछे छोड़ नम्बर 3 बना,,,

*पन्द्रहवीं उपलब्धि*,, टेक्सटाइल उत्पादन में इटली को पीछे छोड़ नम्बर 2 बना,,,

सोलहवीं उपलब्धि*, 
मोबाइल उत्पादन में वियतनाम को पीछे छोड़ नम्बर 2 बना,,,

*सत्ररहवीं उपलब्धि* ,,, स्टील उत्पादन में जापान को पीछे छोड़ नम्बर 2 बना,,,

*अठारहवीं उपलब्धि* ,,, चीनी उत्पादन में ब्राजील को पीछे छोड़ नम्बर 1 बना,,,

*उन्नीसवीं उपलब्धि*
राम मंदिर, धारा 370, ट्रिपल तलाक,
*जिन पर काम जारी है सी.ए.ए .एनआरसी. समान नागरिक संहिता ,जनसंख्या नियंत्रण कानून इत्यादि।*

*बीसवीं उपलब्धि*
हमेशा सोए रहने वाले हिंदूओं
में *राष्ट्रवाद* जगा दिया, पूरी दुनिया के सवा सौ करोड़ हिंदुओं का एक भी राष्ट्र नहीं है।
मैं इस काम को सबसे महत्वपूर्ण मानता हूं।

*इसको कहते हैं मोदी युग*
मोदी सरकार में घाटी से हो रहा है आतंकियों का सफाया,,,
लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी नवेद वट को मार गिराया,,,
हिज्बुल से जुड़े 2 आतंकी ढेर,,
8 महीनों में 230 आतंकियों को 72 हूरों के पास जहन्नुम में पहुंचाया......

कांग्रेस राज में आतंकी दहशत फैलाते थे
मोदी राज में सेना आतंकियों के लिए *दहशत* बनी हुई है,,,
ये है मोदी राज का फार्मूला,,,,

मोदी जी की बढ़ती हुई ख्याति से सारा विपक्ष बौखला गया है कि अब उनके भ्रष्टाचारी हथकंडे कामयाब नहीं हो सकते तब एक अभिमन्यु का वध करने के लिए सारे भ्रष्टाचारिता के महारथी एक होकर चक्रव्यूह की रचना कर रहे हैं 2024 में मोदी को हराने के लिए,,,लेकिन उन भ्रष्टाचारी महारथियों को यह नहीं मालूम कि द्वापर के अभिमन्यु की चक्रव्यूह भेदन की शिक्षा माँ के गर्भ में ली गयी थी और वो भी केवल घुसने की बाहर निकलने की नहीं, लेकिन इस मोदी रूपी अभिमन्यु ने चक्रव्यूह के भेदन व उसे चकनाचूर करने की शिक्षा माँ के गर्भ से बाहर आकर इस माँ भारती से ली है जो अजेय है पराजेय नहीं है,,,,

आइए आज हम सब मिलकर एक संकल्प ले कि इस सेवक को 2024 में इतने भारी बहुमत से विजयी बनावें की वह आंकड़ा गिनीज बुक में दर्ज होकर रह जाय जिस आंकड़े को कोई छू भी न सके,,,,,

 *2024 में मोदी जी को वापस भारत का प्रधानमंत्री बनाए।*
    जय हिंद जय भारत

Tuesday, November 23, 2021

क्या हम नास्तिक हो सकते है

क्या हम नास्तिक हो सकते है?
प्रश्न - क्या हम नास्तिक हो सकते है?
उत्तर- नास्तिक कौन है ईश्वर के अस्तित्व पर जो नकारे वह नास्तिक होता है 
लेकिन ईश्वर? आस्तित्व? ईश्वर अगर हम धर्म को देंखे तो हर धर्म अपने तरीके से बात करता दिखता है और लोग लडने मरने मारने को तैयार हो जाते है आज भी बहुत खून खराबा होता है इजराइल फिलीस्तीन के बीच ,शिया सुन्नी का विवाद, सनातन हिंदू में भी चार वर्ण (कर्म आधार था कभी लेकिन आज जाति बन गई) उन के जातिगत झगडे 
इसे देख कर कुछ लोग कहते है हम भगवान को नही मानते लेकिन धर्म के भगवान को हालांकि आडंबर बहुत जरूरी है संसार में मूलतः तीन प्रकार की पूजा होती है पहले साकार फिर साकार को मन में धारण कर के फिर सीधा निराकार जैसे छोटे बच्चे को सिखाते है ए फार एप्पल फिर वो समझता है ए का अर्थ सारी उम्र वो ए से एप्पल नही कहता
शुरू की अवस्था है ये
अब बात करते है आध्यात्म की एक बडा सर्वर इंटर्नेट का और हम छोटे छोटे सर्वर 
हमारा सर्वर खराब है तो नेट नही चलेगा और हम कहेंगे हम बडे सर्वर को नही मानते अपना सिस्टम ठीक करो भाई आप का वाई फाई खराब है वो जोडने में सक्षम नही है तो जुडो गे कैसे??
अब बात ठीक करने की 
कभी किसी की मदद कर के देखो जो मुसीबत में हो अच्छा लगता है अंदर से, बस यही एहसास उस के होने का है 
न था कुछ तो खुदा था वो कुछ न होता तो खुदा होता वो
डुबोया है जिस के होने न होने ने मुझे न मैं होता तो क्या होता वो?
वो कर्म करो जिस से अंदर अच्छा लगे वो भाव ही है जो तुम्हे जीवित रखे हुए है 
कर के देखना कभी अच्छा लगेगा 
आप सब के अंदर विद्यमान परम तत्व को मेरा नमन 

Monday, November 22, 2021

जय बुद्धाय

टीपू सुल्तान जयंती पर विशेष : #इतिहास के झरोखे से

 🌹🙏📚जय बुद्धाय 📚🙏🌹

👉 जब दो वोट के अधिकार के लिए बाबा साहब लंदन में अंग्रेजों से लड़ रहे थे।
तो उस समय सरआगार खां नाम के मुसलमान ने बाबा साहब का साथ दिया था*।
👉 जब #ज्योतिबाफुले हमारे लिए पहली बार स्कूल खोल रहे थे तब उस समय उस्मान शेख नाम के मुसलमान भाई ज्योतिबा फुले को  जमीन दिया था*।
👉 माता सावित्री बाई फुले को *उस्मान शेख की बहन फातिमा शेख ने सावित्री बाई फुले का साथ दिया* और पहली शिक्षिका भी हुई।
👉जब बाबा साहब हमें पानी दिलाने के लिए सत्यग्रह कर रहे थे तो उस सत्यग्रह को करने के लिए जमीन मुसलमान भाइयों ने दिया था*।
👉बाबा साहब को संविधान लिखने के लिए #संविधान_सभा में नहीं जाने दिया जा रहा था, तब बंगाल के 48% मुसलमान भाइयों ने ही बाबा साहब को चुनकर संविधान में भेजा था।
खुद हमारे अपने लोगो ने वोट नही दिया था बाबा साहब को।
👉 मुसलमान  #टीपूसुल्तान ने हमारी बहन बेटी को #तन ढकने का अधिकार दिया था अन्यथा हिन्दू ब्राह्मण के  कारण हमारी बहन बेटी को #स्तन खुलें रखने के लिए मजबूर किया गया था* 😢
*हमारा दुश्मन मुसलमान नही है*।
👉हमारा दुश्मन वो है जो हमको साफ पानी पीने से #रोक कर रखा ।
👉हमारा दुश्मन वो है जो हमारे गले में #मटका और कमर में झाड़ू बांधने के लिए मजबूर किया।
हमारा दुश्मन वो है जो हमको हजारों सालों से शिक्षा से दूर रखा।
👉हमारा दुश्मन वो है जो हम 85% भाइयो को 6743 जातियों में बाँट दिया।
*हमारा दुश्मन मुसलमान है इस तरह के बहकावे में मत आओ*।
👉अगर मुसलमान इस देश का दुश्मन होता तो,
अकबर का सेनापति मानसिंह एक हिन्दू, और 
महाराणा प्रताप का सेनापति हकीम खां एक मुसलमान नहीं होता।
👉खतरा इस देश को नहीं, खतरा कुर्सी को है*, इसलिए इस तरह से हम (sc.st.obc)को हिन्दू बनाकर और मुसलमान को हमारा दुशमन बाताकर  भड़काया जा रहा है।
👉अगर आप अभी नहीं जागे तो सरकार यह व्यवस्था करने जा रही है, आपके सामने थाली तो रखी जायेगी और उसमें भोजन भी रखा जायेगा, लेकिन आपका हाथ और मुँह बांध दिया जायेगा।
👉खाना आपके सामने रखा है आप लार तो टपकाओगे लेकिन खाना आपको मिलने वाला नहीं है।
इसलिए अगर चाहते हो कि मुँह पर लगाम न लगे तो, 👉आप अपनी जिम्मेदारी को समझे* और समाज को जगाने और संगठित करने का काम करिये।
*वो दिन - रात काम कर रहें हैं संविधान को खत्म करने के लिए*, क्या आप इतना busy हो गए हैं कि आपके पास समय नहीं है।
👉कम से कम एक या दो घण्टे का समय दीजिए* उनके बीच में जाइये।
यह मत सोचिए कि हमें कोई 100 - 200 देगा या 100 - 200 का तेल भरवायेगा तब हम चलेंगे।
👉क्यों की बाबा साहब ने किसी से यह नहीं कहा था कि मेरे बीबी बच्चे भूखे मर रहे है।
उसके लिए मुझे पैसे दो तो मैं समाज के लिए काम करूंगा। इसलिए संगठित हो जाइए।
अन्यथा सोचने का वक्त भी नही मिलेगा।

Thursday, November 18, 2021

ममी की सटीक भविष्यवाणी

ममी की सटीक भविष्यवाणी

मिस्र के एक राजा फिरौन की ममी को जिस संग्रहालय में
रखा गया है, उससे पता चलता है कि वर्ष 2020 से ममी मे
से उच्च आवृत्ति वाली सूक्ष्म ध्वनि सुनाई दे रही है। शुरू में
इन ध्वनियों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया लेकिन अब
जनवरी 2021 में वैज्ञानिकों की एक टीम इस मामले में
दिलचस्पी लेने लगी, इसलिए संग्रहालय के अधिकारियों
और पुरातत्वविदों ने संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस,
रूस, चीन, भारत के वैज्ञानिकों सहित एक साथ खोज और
जांच करने का फैसला किया। में शामिल हो गए।

ये ध्वनियाँ बहुत उच्च आवृत्ति की थीं, जिनकी आवृत्ति
30000 हर्ट्ज से अधिक थी, जिन्हें केवल उच्च गुणवत्ता
वाले ध्वनि उपकरणों द्वारा सुना जा सकता था, मानव कानों
द्वारा नहीं। वैज्ञानिकों ने इन उपकरणों को फिरौन की ममी
के बेहद करीब रखा है। इन 30 देशों के वैज्ञानिक 5 महीने,
24 दिन और 22 घंटे तक रात-दिन देखे बिना फिरौन की
लाश से आने वाली आवाज़ों को रिकॉर्ड करने में सक्षम थे।

10 नवम्बर , 2021 को यह पता चला कि इन आवाज़ों में
हज़ारों साल पुरानी भाषा में पूरी मानव जाति के लिए एक
संदेश है। जब इस आवाज का अनुवाद किया गया तो
फिरौन की ममी जो कह रही थी उसे सुनकर दुनिया दंग रह
गई। कोई भी न्यूज चैनल इस खबर को दिखाने के लिए
तैयार नहीं है क्योंकि इस खबर से कई बार हार्ट फेल हो
सकता है !!

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फिरौन की लाश कुछ समय से उच्च आवृत्ति की ध्वनि में
जोर-जोर से चिल्ला रही है,
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की
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कुछ भी हो जाए, उत्तर प्रदेश मे आएगा तो योगी ही
.
🤣🤣🤣🤣🤣

Sunday, November 14, 2021

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3 Important Things You Should Know About Cryptocurrency

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Saturday, November 13, 2021

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